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मुसलमानों पर भागवत के ज्ञान से बदलेंगे हालात?

आरएसएस ने कहा हिन्दू मुस्लिम डीएनए एक है

कुछ दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हिन्दू मुसलमानों के डीएनए पर एक बयान दिया। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के इस कार्यक्रम में भागवत ने एक तो सभी भारतीयों का डीएनए एक बता दिया और दूसरे सभी भारतीयों को एक ही पूर्वज की संतान तक कह दिया।

भागवत के बयान पर हड़कंप तो मचना ही था और वो शुरू भी हो गया। क्योंकि आरएसएस को सीधे सीधे हिंदुओं का संगठन ही माना जाता है जो हिन्दू राष्ट्रवाद के लिए दिन रात एक किए रहता है। लेकिन भागवत हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए इतना कुछ बोल गए कि वो उनके समर्थकों को तो छोड़िए उनके विरोधियों को भी हजम नहीं हुआ।

भागवत एक ओर जहाँ हिन्दुओं और मुसलमानों के साथ सभी भारतीयों का डीएनए एक होने की बात कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ गोरक्षा के नाम पर लिंचिंग करने वालों को हिन्दू मानने से इनकार कर रहे थे। शायद भागवत जी ये भूल गए थे कि इन तथाकथित गोरक्षकों में ज्यादातर उस बजरंग दल के लोग हैं जो सीधे सीधे आरएसएस से जुड़ा है। तो क्या मोहन भागवत का अपने ही सहयोगी संगठन बजरंग दल से मोह भंग होने लगा है। जानकारों की मानें तो ऐसा बिल्कुल नहीं है, भागवत सिर्फ बजरंग दल के लोगों को मारपीट और हमला न करने का संदेश दे रहे थे।

वजह साफ है आरएसएस पर दबाव है कि वो बीजेपी का वोट बैंक बनाए रखने के साथ साथ बढ़ाने में भी मदद करे। क्योंकि पिछले बंगाल चुनाव में बीजेपी की नैया पार नहीं लग पाई, जबकि पूरा चुनाव बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ बढ़ती मुस्लिम आबादी के डर पर लड़ा गया। हालांकि बीजेपी ने बड़ी छलांग लगाते हुए पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले दस गुना से ज़्यादा सीटें हासिल कर लीं लेकिन वो ममता की कुर्सी को नहीं हिला पाई।

अब अगले साल बीजेपी की सबसे बड़ी परीक्षा होने वाली है। मोदी एंड कंपनी को यूपी का चुनाव लड़ना है और न केवल यूपी को जीतना है बल्कि यूपी में सीटों का ग्राफ भी 300 के पार ही रखना है। ये अपने आप में बीजेपी के लिए बहुत बड़ी चुनौती है और इसके लिए बीजेपी को सभी जाति बिरादियों के वोट तो चाहिए ही होंगे साथ ही विरोधियों के वोट बैंक में सेंध भी लगानी होगी।

बीजेपी और उसकी रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले आरएसएस ने इसके लिए सियासी चालें चलनी शुरू कर दी हैं, पहले तो छोटी छोटी पार्टियों से गठबंधन करना है और फिर समाजवादी पार्टी और बीएसपी के वोटरों को गफलत में डालना है। अगर सीधे सीधे खुद बड़ा धमाल नहीं मचा पाए तो विरोधियों को कमजोर करके अपना बंपर बहुमत बनाए रखना ही उनका लक्ष्य है।

इसीलिए डीएनए से लेकर एक पूर्वज और लिंचिंग जैसे मुद्दे उठाकर भागवत ने मुसलमानों और दूसरी पिछड़ी जातियों के वोटरों में कनफ्यूजन फैलाने की चाल चल दी है, उन्हें पता है कि हिन्दू मुस्लिम एकता वाला ये दांव किसी भी कीमत पर खाली नहीं जाएगा।

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